15-March-2016 (मेरे माता पिता)



फूलो से हमको सजाकर 

काँटों से दामन भर लेते हो 

धूप में तुम पेड़ बनकर 

साया हम को देते हो

दर्द में तुम मरहम बनकर 

घाव सारे भर देते हो

 तुम तो वो दीप हो जो 

खुद जलके रोशन हमेँ कर ते हो

                                        कॉपीराइट सुदीप बिस्वास

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