मैं सुदीप बिस्वास हूं, मैं एक पेशेवर गीत लेखक और संगीतकार हूं। शायरी और शायरी का शौक। मैं अपने ब्लॉग में अपनी शायरी, गीत और संगीत साझा करता हूं
10-7-2016 (में खुद ही अपनी मंज़िल)
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में खुद ही अपनी राह हु में खुद ही अपनी मंज़िल में खुद को ही अगर ढूंढ लूं फिर क्या हो मेरी मुश्किल में खुद ही अपनी राह हु में खुद ही अपनी मंज़िल सुदीप बिस्वास द्वारा कॉपीराइट
यही कोशिस और किस्मत के बीच में मेरी कश्ती किनारा ढूंढ रहा है बस ज़िन्दगी के लहर में लहरा कर बहा जा रहा है जाने कब कोई तूफ़ान नया मूड लेले फिलहाल समुद्र के बीच में भटक के बहा जा रहा है सुदीप बिस्वास द्वारा कॉपीराइट
दो पल दो लम्हे वो दिल की महफ़िल के याद आती है वो बातें ज़िंदगी भर इस दिल में आ गया है किसी पे दिल तो क्या करे दिल जो आया है उन पर तो हो गया जिंदगी मुश्किल से सुदीप बिस्वास द्वारा कॉपीराइट
ह मान टूटा है दिल फिर भी तेरे मोहब्बत का मोहताज नहीं जक ले तू अपने में दिल में तुजसे ज़ादा तो में बर्बाद नहीं जरा पूछ तो लेता अपने दिल से खंजर उठाने से फेहले मेरे पास तो तेरा दिल था मेरा दिल नहीं सुदीप बिस्वास द्वारा कॉपीराइट
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