14-July-2020 एक कदम और करीब
एक कदम और करीब में मंजिल के तरफ आ गया. न माना दुनिआ की बस मन मॉझी बन गया. है खुशी इस पल की पर और दूर जाना है. अभी तो लाख कदम पर मंज़िल के करीब जाना है. सुदीप बिस्वास द्वारा कॉपीराइट
मैं सुदीप बिस्वास हूं, मैं एक पेशेवर गीत लेखक और संगीतकार हूं। शायरी और शायरी का शौक। मैं अपने ब्लॉग में अपनी शायरी, गीत और संगीत साझा करता हूं